अब्बास बर्मावाला- 'कुछ गाने कभी नहीं मरते'

बॉलीवुड ने हॉल ही में पुरानी फिल्मों के नाम पर पुराने गानों पर बनी फ़िल्में देखी हैं। फिल्म किस किस को प्यार करूँ जो कि 1969 की फिल्म तुमसे अच्छा कौन हैं से, बार बार देखो जो कि 1962 की फिल्म बार बार देखो हजार बार देखो से और ऐ दिल है मुश्किल जो सीआईडी के एक गाने से प्रेरित है। गानों के टाइटल का फिल्मों के नाम के रूप में उपयोग होने पर बॉलीवुड निर्देशकों की राय बंटी हुई है। 

अब्बास बर्मावाला ने कहा, "कुछ ऐसे गाने हैं जो कभी नहीं मरते। वे कितने भी पुराने हों पर हमरे ज़हन में रहते हैं। पुराने गानो पर फिल्मों के नाम रखने से लोगों के साथ एक इमोशनल कनेक्ट बनता है। यह भारतीय सिनेमा के इस खजाने को पुनर्जीवित करने में भी मदत करता है।" मोहित सूरी क भी कुछ ऐसा ही लगता है वे कहते हैं, "गाने फिल्मों से अधिक समय तक याद किए जाते हैं। मेरी फिल्म 'हमारी अधूरी कहानी' एक तरफ़ा प्यार पर आधारित थी तो यह नाम मेरी समझ से बिलकुल सही था।"

दूसरी तरफ सुभाष घई और अमोद मेहरा जैसे निर्देशकों का इस मुद्दे पर अलग विचार हैं। सुभाष घई कहते हैं, "डीडीएलजे से यह ट्रेंड शुरू हुआ। फिल्म का टाइटल गाने के नाम पर होने से फिल्म आसनी से नोटिस की जाती है। यह प्रड्यूसर फिल्म का नाम चूस करने की सिरदर्दी से भी बचाता है पर इससे फिल्म रिस्की जोन में भी जा सकती है जैसे 'एक हसीना थी' गई थी। वहीँ अमोद महरा का मानना है, "यह सिर्फ आलस है। यह कुछ भी चलता है की मानसिकता को दर्शाता है। यहां क्रिएटिविटी मौजूद नहीं है। रेट्रो गाने हम भूल चुके हैं और आज की जनरेशन उन्हें तब तक नहीं जानते जब तक वे उन्हें गूगल नहीं कर लेते तो उन नामों पर फीमेन बनाने का कोई फायदा नहीं है और ऐसे में फिल्म के टाइटल और स्टोरी में कोई ताल मेल भी नहीं होता।" 

अब्बास बर्मावाला- 'कुछ गाने कभी नहीं मरते'

Source: deccanchronicle.com