‘एंग्री इंडियन गॉडेस’: सेंसर बोर्ड की अजीबोग़रीब मांगों से निर्माता गौरव ढींगरा खफ़ा

'एंग्री इंडियन गॉडेस', जो ऐसी पहली इंडियन फ़िल्म मानी जा रही है जिसमे महिलाओं की छिपी चाहत को काफ़ी वास्तविक तरीके से पेश किया गया है, को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से मंजूरी मिलने के लिए काफ़ी मुश्किल समय का सामना करना पड़ा था। ड्रामा फ़िल्म बेहुदे म्यूट के बाद 4 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ की गई है। सीबीएफसी द्वारा जो शब्दों की लिस्ट मिली है जिसे म्यूट करना या रिप्लेस करना है, वह निर्माताओं के लिए बेहद अजीबोग़रीब है, ख़ासकर गौरव ढींगरा के लिए, जिनका सावल है ये "सेंसरशिप या सर्टिफिकेशन?" पान नलिन के निर्देशन में बनी फ़िल्म में सारा जेन डायस, तनिष्ठा चटर्जी, अनुष्का मनचंदा , संध्या मृदुल और अमृत मघेरा मौजूद हैं।

फ़िल्म, जिसे पहले ही विभिन्न फिल्म समारोहों में अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं, को पहले 'केवल वयस्कों' के प्रमाण पत्र के लिए सीबीएफसी द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था, इसका मतलब है सेंसर बोर्ड के मुताबिक यह फिल्म भारत में रिलीज करने के लिए फिट नहीं थी।"फिल्म का टाइटल ऐसा है जो इस फिल्म से रेसेम्बल नहीं करता है”, ऐसा सीबीएफसी ने दावा किया है। निर्माता, उनके अन्य बिरादरी वालों की तरह, रिलीज़ के लिए बेताब थे और इसलिए फ़िल्म को एडिट कर, हर गाली वाले शब्द को म्यूट कर एक बार फिर से इसे बोर्ड के समक्ष पेश किया गया। लेकिन सीबीएफसी में मौजूद पुनरीक्षण समिति ने एक बार फिर से इसे खारिज कर दिया। ढींगरा का कहना है, यह "बिल्कुल अजीबोग़रीब!" था।

जिन शब्दों पर बोर्ड ने आपत्ति जताई है, उनकी लिस्ट काफी विचित्र थी। शब्द जैसे पास से गुजर रहे आदमी को ‘लंच’ बुलाना, ओरल सेक्स के बारे में एक डायलाग में “सरकार” शब्द का प्रयोग” “इस में सरकार का कोई रोल नहीं है”; “इंडियन फिगर”, शरीर की वाइटल स्टैट्स के बारे में; “ओर्गस्म” और “डिलडो” जैसे शब्दों को म्यूट करने को कहा गया। निर्माताओं की परेशानी ये थी कि इन सभी सुझावों को एक 'केवल वयस्कों' टैग के साथ शामिल करना था।

"मुझे नहीं पता कि ये सेंसरशिप है या प्रमाण पत्र, यह बेहद भ्रमित करने वाला है। अगर सेंसरशिप है, तो फिर आप इसे स्क्रिप्ट के लेवल पर सेंसर करें, जब इसमें ज़्यादा पैसा नहीं डाला गया हो। इस फिल्म को बना लेने के बाद क्यों आप मुझसे इस में कट्स करने के लिए कह रहे हैं? इस फ़िल्म को बनाने के लिए मैंने अपना घर बेच दिया है, मैं इसको बनाता ही क्यों अगर ये सब कुछ कट ही होना था?” गुस्से में ढींगरा ने कहा। इतनी अड़चनों के बाद, आखिरकार फिल्म को 4 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ कर दिया गया है।

‘एंग्री इंडियन गॉडेस’: सेंसर बोर्ड की अजीबोग़रीब मांगों से निर्माता गौरव ढींगरा खफ़ा


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