'मैंने ना तो फ़िल्म डायरेक्ट की है न ही प्रोड्यूस’: फ़तवा के बारे में ए आर रहमान

रज़ा अकैडमी द्वारा एआर रहमान के खिलाफ फ़तवा जारी करने के बाद से विवाद भड़क उठने के इतने दिनों बाद, ऑस्कर विनिंग म्यूजिक कंपोजर ने आखिरकार इसका जवाब दिया है।  दो बार ग्रैमी विनर ने कहा, “मैंने फ़िल्म मुहम्मद: मैसेंजर ऑफ़ गॉड को ना ही डायरेक्ट न हीं प्रोड्यूस किया था। उसमे सिर्फ मेरा संगीत था। फिल्म में काम करने का मेरा आध्यात्मिक अनुभव बहुत ही निजी हैं और मैं इसे किसी के साथ शेयर करना पसंद नहीं करूँगा।”

म्यूजिशियन, जो एक हिंदू घर में पैदा हुए थे, लेकिन  23 साल की उम्र में इस्लाम में परिवर्तित हो गए थे, और अपना नाम आर एस दिलीप कुमार से बदल कर अल्लाह रक्खा रहमान रख लिया था, ने एक स्टेटमेंट में कहा, “इस फिल्म के लिए संगीत कंपोज़ करने का मेरा फैसला अच्छी नीयत से था किसी को ओफ्फेंस करने का मेरा कोई इरादा नहीं था। वास्तव में, यह फ़ैसला [ फिल्म के लिए संगीत कंपोज़ करने का] उसी पॉइंट ऑफ़ व्यू पर बेस्ड था जो मिस्टर नूरी द्वारा जाहिर किया गया है। क्या होगा, अगर कभी मुझे कभी अल्लाह के सामने जाने की ख़ुशकिस्मती का मौका मिल जाये, और जजमेंट डे पर उन्होंने मुझसे पूछा कि “मैंने तुम्हे भरोसा, काबिलियत, पैसा, शोहरत और सेहत इतना कुछ दिया.....और तुमने मेरे प्यारे मोहम्मद की फिल्म के लिए संगीत भी नहीं दिया?”

रजा अकैडमी ने पैगंबर मुहम्मद पर ईरानी फिल्म के लिए रहमान और निर्देशक माजिद मजीदी के खिलाफ फतवा जारी किया है। सईद नूरी रजा अकादमी के हेड के मुताबिक, "हम टाइटल के खिलाफ हैं। लोगों को अगर ये फ़िल्म पसंद नहीं आई तो वे इसे बुरे ढंग से इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसका मतलब होगा पैगंबर का अपमान। एक्टर्स ने  इस फिल्म में अभिनय करने के लिए पैसे लिए हैं, वास्तविक जीवन में उनका किरदार शक के घेरे में आता है। हम मुसलमान कैसे इस तरह की बातें होने की इजाज़त दे सकते हैं?"

'मैंने ना तो फ़िल्म डायरेक्ट की है न ही प्रोड्यूस’: फ़तवा के बारे में ए आर रहमान
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