अगर आपने सुरों के शहंशाह मोहम्मद रफ़ी के ये गाने नहीं सुने तो क्या सुना !

हिंदी सिने जगत के महान गायकों में से एक मोहम्मद रफ़ी ने अपने बेहतरीन नगमों से हिंदी फिल्मों की छवि ही बदल कर रख दी। इस महान व्यक्ति को लोग उनके गानों से ज़्यादा उनकी जिन्दादिली के लिए याद करते थे। 13 साल की उम्र में गायिकी शुरू करने वाले रफ़ी 24 सितम्बर 1924 को अमृतसर के कोटला सुल्तान में हुआ था। इन्होने बॉलीवुड फिल्मों में अपनी गायिकी की शुरुआत श्याम सुंदर की फिल्म ‘गाँव की गोरी’ में गाना गा कर की थी। 

ऐसा कहा जाता है कि रफ़ी साहब की आवाज़ एक्टर शम्मी कपूर पर अच्छी लगती है और उन्होंने उनके लिए कई बेहतरीन गाने भी गए हैं। लेकिन ये बात कम ही लोग जानते हैं कि वो एक्टर एक रूप में शम्मी कपूर को न्हि९न बल्कि राजेन्द्र को पसंद करते थे। ऐसे थे सुरों के बादशाह जो अपने समय में हमेशा शीर्ष पर रहे।इनकी पॉपुलैरिटी का आलम ये था कि जब 31 जुलाई 1980 को इन्होंने दुनिया को अलविदा कहा तो लगभग 10 हज़ार से ज़्यादा लोग इनकी शव यात्रा में शामिल थे। और इसके बाद दो दिन तक के लिए राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई थी।

सुनिए इनके 10 बेहतरीन नगमे-

1. क्या हुआ तेरा वादा 

2. चाहूँगा मैं तुझे साँझ सवेरे 

3. तुझ को पुकारे मेरा प्यार 

4.बाबुल की दुआएं लेती जा 

5. परदा है परदा 

6. ये रेशमी जुल्फें 

7.बहारो फूल बरसाओ ..मेरा महबूब आया है 

8. ये दुनिया ..ये महफ़िल 

9. खुश रहे तू सदा 

10. आने से उनके आये बहार 

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