फिल्म 'अलीगढ़' को नेशनल अवार्ड ना मिलने पर नाराज़ हैं डायरेक्टर हंसल मेहता !

शुक्रवार को 64वें नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड्स का ऐलान किया गया। इस ऐलान ने जहाँ कई बॉलीवुड सितारों को ख़ुश होने का मौक़ा मिला, वहीं कुछ असंतुष्ट रह गए। हंसल मेहता भी ऐसे ही निर्देशक में से एक हैं, जो नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड्स ना मिलने से निराश हैं।

फिल्म 'अलीगढ़' को नेशनल अवार्ड ना मिलने पर नाराज़ हैं डायरेक्टर हंसल मेहता !

हंसल को अपनी फ़िल्म 'अलीगढ़' के लिए काफी उम्मीदें थीं। मगर नेशनल अवॉर्ड्स की लिस्ट में अलीगढ़ का ना पाकर हंसल निराश हो गए और उन्होंने ट्वीटर के ज़रिए अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की। हंसल ने लिखा, ''मुझसे लोग फोन करके पूछ रहे हैं, क्या मैंने फ़िल्म को नेशनल अवॉर्ड्स के लिए भेजा था और क्या मुझे इससे निराशा हुई है। हाँ, मैंने नेशनल अवॉर्ड्स के लिए फ़िल्म भेजी थी और दूसरे कई सहकर्मियों की तरह मुझे भी निराशा हुई है। मैं सभी विजेताओं को बधाई देता हूँ।''

हंसल ने आगे लिखा कि ज्यूरी के लिए हर साल काम मुश्किल होता जा रहा है और कई लोगों को निराश होना पड़ता है। कुछ अवॉर्ड्स पर बहस की जा सकती है और अच्छे काम की उपेक्षा होने पर अफ़सोस होता है। हालांकि कुछ अच्छी फ़िल्मों को अवॉर्ड मिल रहे हैं और बेहतरीन काम को सराहा जा रहा है। हंसल ने मनोज बाजपेयी, राजकुमार राव और फ़िल्म से जुड़े दूसरे लोगों की हौसलाअफ़जाई करते हुए चैंपियन बताया है।

हंसल ने एक और ट्वीट में लिखा है कि उनको यही आशा है कि धारा 377 और एलजीबीटीक्यू अधिकारों की जो बहस शुरू हुई थी, वो नज़रअंदाज़ नहीं होगी। अगर अलीगढ़ ने इन मुद्दों पर रौशनी डाली है और भारतीय समाज में उपेक्षित रहा एलजीबीटीक्यू समुदाय सम्मान के साथ आगे बढ़ पाता है तो हम समझेंगे कि हमारा मक़सद पूरा हुआ।

क्रिटिक्स द्वारा सराही गई फ़िल्म 'अलीगढ़' उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर पर आधारित पर थी, जिसमें मनोज बाजपेई ने यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर का रोल निभाया था। प्रोफेसर को उनकी सेक्शुएलिटी की वजह से निकाल दिया जाता है। असल ज़िंदगी से प्रेरित इस फ़िल्म में राजकुमार राव ने जर्नालिस्ट की भूमिका निभाई थी, जिसने इस पूरे प्रकरण को दुनिया के सामने उठाया था।