‘बाकियों को फिल्म बनाने दें, मैं सिर्फ लिखना चाहती हूँ’- जूही चतुर्वेदी

लेखक की भूमिका हमेशा से उस कल्पना को उकेरने की रही है जो सामान्य लोगों की सोच से परे हो और जूही चतुर्वेदी ने एक लेखिका के तौर पे हमे जिस कल्पना से रूबरू कराया उसे हम व्यक्त नहीं कर सकते शूजित सरकार को ‘विक्की डोनर’ और ‘पिकू’ जैसी असाधारण एवं सफल फिल्मों में हर संभव सहयोग करने वाली जूही चतुर्वेदी का लेखन के प्रति अपने जूनून और प्यार को देखते हुए, फिलहाल डायरेक्शन करने का कोई इरादा नहीं है

जूही चतुर्वेदी ने सिनेमा को असाधारण चरित्रों से नवाज़ा है इनमे मुख्य हैं ‘विक्की डोनर’ के फर्टिलिटी एक्सपर्ट ‘डॉ. बलदेव चड्ढा’ जिसे परदे पर ‘अन्नु कपूर’ ने निभाया था एवं ‘पिकू’ का ढीला-ढाला चिडचिडा बंगाली विधुर ‘भास्कोर बनर्जी’ जिसे महानायक ‘अमिताभ बच्चन’ ने निभाया था जूही कहती हैं, “अगर हर कोई डायरेक्टर बन जाएगा, तो लिखेगा कौन?’ आप बाकियों को फिल्म बनाने दें, मैं सिर्फ लिखना चाहती हूँ

साल 2012 में फिल्म ‘विक्की डोनर’ की पटकथा से बतौर लेखिका बॉलीवुड में पदार्पण करने वाली जूही का मानना है कि अच्छे लेखक हमेशा से रहे हैं, लेकिन आज के ज़माने में अच्छी कहानी को तवज़्ज़ो दी जा रही है दर्शकों के गुणगान की महत्वता और इस बदलाव में उन्हें मुख्य कारण बताते हुए जूही कहती हैं, “ऐसा नहीं है कि आज के लेखक अचानक से बेहतर हो चले हैं, बल्कि लेखन सबका केंद्र बिंदु बन चूका है जो पहले नहीं हो रहा था, और जो थोडा बहुत था उसे हम आर्ट फिल्म्स का नाम दे दिया करते थे

‘बाकियों को फिल्म बनाने दें, मैं सिर्फ लिखना चाहती हूँ’- जूही चतुर्वेदी