इस एक्ट्रेस से शादी करने के लिए किशोर कुमार ने बदला था अपना धर्म !

चलते-चलते मेरे ये गीत याद रखना.. कभी अलविदा न कहना.. जब भी ये गीत जबान पर आता है तो एक ही शख्स का ख्याल आता है और वो हैं हमारे किशोर दा, जिन्होंने अपनी मीठी आवाज़ से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में मिठास घोल दी। किशोर दा अपनी अलग गायिकी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने उस समय के लगभग हर बड़े सितारे के लिए गाना गया है। किशोर कुमार उन चुनिंदा कलाकारों में से एक थे जिन्हें सिंगिंग और एक्टिंग दोनों में महारथ हासिल थी। 

4 अगस्त 1929 को मध्यप्रदेश के खंडवा में जन्मे किशोर कुमार का असली नाम आभास गांगुली था और ये मशहूर एक्टर अशोक कुमार के छोटे भाई थे। किशोर दा बचपन से बड़े भाई की तरह एक्टर बनना चाहते थे। लेकिन वो उनके गानों ने ज़्यादा पॉपुलैरिटी बटोरी। 

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किशोर दा ने अपनी गायिकी के साथ एक और वजह से सुर्खियाँ बटोरी थी और वो थी उनकी चार शादियाँ। इनकी पहली शादी रुमा गुहा ठाकुरता से हुई थी जो कुछ सालों में ही आपसी अनबन के चलते टूट गई। बाद में इनका दिल उस जमाने की सबसे खूबसूरत एक्ट्रेस मधुबाला पर आ गया। मधुबाला भी दिलीप कुमार से खत्म हुए रिश्ते से उभर रही थीं। फिल्म ‘महलों के ख्वाब’ की शूटिंग के दौरान ये दोनों करीब आये और फिर बात सीधे शादी पर आ रुकी। मधुबाला के प्यार में किशोर दा इतने पागल थे कि उन्होंने इस्लाम धर्म अपना कर अपना नाम करीम रख लिया था। और फिर मधुबाला से निकाह किया। लेकिन किसे पता था ये रिश्ता 10 साल भी नहीं चल पायेगा। साल 1969 में मधुबाला ने किशोर दा के साथ दुनिया को ही अलविदा कह दिया।

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किशोर दा ने साल 1976 में एक्ट्रेस योगिता बाली से तीसरी शादी की। ये शादी शादी भी नाकाम साबित ही और योगिता ने किशोर दा को तलाक दे कर एक्टर मिथुन से शादी कर ली। इसके बाद साल 1980 में उन्होंने एक्ट्रेस लीना चंद्रावत से चौथी और आखिरी शादी की। जिससे उन्हें 2 बेटे भी हैं।

ऐसा कहा जाता है कि किशोर दा अपनी पत्नियों को बंदरिया कह कर बुलाते थे, उनका कहना था कि उनकी चारों बीवियां बम्बई के बांद्रा की रहने वाली हैं इसलिए वो उन्हें बंदरिया कह कर बुलाते हैं।

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किशोर दा ने अपने करियर में अब तक के सबसे बेहतरीन गाने गए। उन्हें इन गानों के लिए कई अवार्ड से भी नवाज़ा जा चुका है। उन्हें ‘आराधना’ फिल्म के गाने रूप तेरा मस्ताना के लिए पहला फिल्मफेयर अवार्ड मिला था उसके बाद ‘अगर तुम ना होते’, ‘सागर किनारे’ ‘पग घुंघरू बांध’ ‘हजारों राहें मुड़कर देखी’, ‘खाइए के पान बनारस वाला’ जैसे गानों के लिए अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। लगभग 19 गानों के लिए इन्हें फिल्मफेयर नोमिनेशन मिला था।

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किशोर दा ने साल 1987 में फिल्मों से सन्यास लेने का फैसला लिया। उन्हें अपनी जन्म भूमि खंडवा से बहुत लगाव था। इसलिए वो हमेशा के लिए खंडवा में बस जाना चाहते थे। वो अक्सर कहा करते थे कि ‘दूध जलेबी खायेंगे, खंडवा में बस जायेंगे’ लेकिन वक़्त को कुछ और मंजूर था 18 अक्टूबर 1987 को दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई। अपने गाँव से लगाव होने के वजह से इनका अंतिम संस्कार खंडवा में ही किया गया था। 

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आज किशोर दा अपने बेहतरीन गानों के जरिये हमारे दिलों में बसे हुए हैं।

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