शर्मिला टैगोर ने साहित्य अकैडमी अवार्ड्स लौटाने के बारे में दी अपनी राय

पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने हाल ही में साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले साहित्यिक दिग्गजों पर अपनी राय का इज़हार किया। सीआईआई बिग पिक्चर शिखर सम्मेलन 2015 में उन्होंने इसे एक बहादुर और स्पान्टैनीअस कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा देश के ताने-बाने के लिए एक गंभीर खतरा है।

‘अमर प्रेम’ एक्ट्रेस ने कहा, “यह एक साहसी कदम है, क्योंकि यह असंतोष अब हिंसक हो गया है, अब यह सिर्फ मौखिक असहमति नहीं रह गई है। इसमें फिजिकल असाल्ट भी शामिल है। लोग इसके खिलाफ़ खड़े हो रहे हैं और इसका मुकाबला भी कर रहे हैं। मुझे लगता है यह एक बहुत ही सकारात्मक है और स्पान्टैनीअस प्रतिक्रिया है।“ उन्होंने आगे कहा, “यह मेरी अपनी राय है कि लेखक, जो भी इन पुरस्कारों को लौटा रहे हैं, यह उनका स्पान्टैनीअस मूवमेंट है। ये जो कुछ भी हो रहा है वह हमे इमरजेंसी और बाबरी मस्जिद के बारे में याद दिलाता है। यह हमें यह याद दिला रहा है कि यह हमारे देश के ताने-बाने के लिए एक गंभीर खतरा बनता जा रहा है। यह एक स्पान्टैनीअस विरोध है।"

अभिनेत्री ने दादरी भीड़ हत्या के बारे में बात की और कहा, “दादरी में जो भी हुआ वो डरावना था। यह वास्तव में सीमा पार कर रहा था। किसी ने भी इसकी मजबूती के साथ निंदा नहीं की। मैं किसी तरह का न्याय मिलते और दोषियों को सजा पाते देखना चाहती हूँ। क्योंकि अगर हम ऐसा नहीं करते, तो एक गलत संदेश बाहर जायेगा। हर समय लोग मौन रहते हैं, सज़ा से मुक्ति के दायरे बढ़ते जा रहे हैं।“ उन्हें लगता है कि यह विरोध शायद इस देश की छवि को ठीक करने का सबसे अच्छा तरीका है।

शर्मिला टैगोर ने साहित्य अकैडमी अवार्ड्स लौटाने के बारे में दी अपनी राय