40% लोगों के पास खाना नहीं है और आपको किसिंग सीन की चिंता है, कहना है शेखर कपूर का

मासूम फेम निर्देशक शेखर कपूर उनमे से एक हैं जिनका मानना है कि पुरस्कार लौटना किसी भी समस्या का हल नहीं है। फिल्मकार ने आखिरकार चुप्पी तोड़ी और असहिष्णुता, सेंसरशिप मामले और फिल्म बिरादरी में फैली अशांति के बारे में में अपनी राय जाहिर की। "40% दर्शकों को खाना नहीं मिल रहा है और आपकी सबसे बड़ी चिंता जेम्स बॉन्ड का किसिंग सीन है, जिसे काट दिया गया है?”  उन्होंने कहा।

"मुझे 'बैंडिट क्वीन' में विश्वास था। और फ़िल्म के लिए मैंने तीन साल तक सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ी। अगर आप अपनी फिल्म में विश्वास करते हैं, आगे बढिए और इसके लिए लड़िये और देखिये आप कितनी दूर जा सकते हैं। इसी तरह, अगर आप वास्तव में असहिष्णुता में विश्वास करते हैं, तो बाहर निकलिए और कुछ करिए। पुरस्कार वापस देना सबसे आसान रास्ता है”,  कपूर ने डीएनए को बताया।

"असहिष्णुता आपको बहुत ज़्यादा प्रभावित नहीं कर रही है जितना कि उन लोगों को जो जाति व्यवस्था के तहत रह रहे हैं। भारत अभी बदल रहा है और इसमें थोड़ी हलचल तो होगी ही। लेकिन यह हलचल बदलाव के लिए ज़रूरी है, प्रगति के लिए ज़रूरी है”, उन्होंने कहा।

  40% लोगों के पास खाना नहीं है और आपको किसिंग सीन की चिंता है, कहना है शेखर कपूर का

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