मूवी रिव्यू 'तेरा सुरूर' : इसका हैंगओवर चार दिनों तक नहीं उतरने वाला !

इस बार डबलिन में बजी देसी डफली !
मूवी रिव्यू 'तेरा सुरूर' : इसका हैंगओवर चार दिनों तक नहीं उतरने वाला !
Source : india.com

हिमेस भाई लेकर आये हैं 'तेरा सुरूर' जो सौ टका है देसी, और कसम लाल किले की इसका हैंगओवर नहीं उतरने वाला चार दिनों तक।  डेढ़ घंटे की इस फिल्म में देशभक्ति से लेकर ढिशूम-ढिशूम सब कुछ है और डायलॉग्स पर तो कसम से मर जावां देसी गुड़ खा के !

फॉर एक्जाम्पल : आजा ! पागल पागल खेलते हैं !

जय माता दी लेट्स रॉक !

मूवी रिव्यू 'तेरा सुरूर' : इसका हैंगओवर चार दिनों तक नहीं उतरने वाला !
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तो कुल जमा भई फिल्म में रघु हैं हिमेश रेशमिया जिनकी गर्लफ्रेंड उनसे नाराज़ हो जाती हैं और चली जाती हैं डब्लिन किसी के बहलाने पर और वहां कोई उन्हें फंसा देता है ड्रग स्मगलिंग के केस में ! अब गर्लफ्रेंड क्यों नाराज़ हुई वो तो आप हमसे ना पूछिये लेकिन हाँ, फिल्म देखेंगे तो पता चल जाएगा। लेकिन  रियल लाइफ में आपकी गर्लफ्रेंड आपसे क्यों नाराज़ होती है और आप उसे कैसे मनाएंगे इसका कोई सोल्यूशन इस फिल्म में नहीं मिलेगा आपको। सॉरी बट नॉट सॉरी !

मूवी रिव्यू 'तेरा सुरूर' : इसका हैंगओवर चार दिनों तक नहीं उतरने वाला !
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अब तारा (फराह करीमी ) चूंकि ड्रग माफिया के केस में फंसा दी गयी हैं, तो हिमेश उनको बचाने नहीं जाएंगे तो सिक्स पैक एब्स कैसे दिखाएंगे और एक्शन कैसे करेंगे , और उससे भी बड़ी बात, "जय माता दी , लेट्स रॉक" कैसे बोलेंगे ! इसीलिए, ये सब होना बेहद ज़रूरी है।  

नसीरुद्दीन शाह उनको सिखाते हैं कि कैसे गर्लफ्रेंड को जेल से बाहर निकाला जाए , और कुछ एक्शन सीन्स के बाद रघु तारा को बचा लेते हैं।  

मूवी रिव्यू 'तेरा सुरूर' : इसका हैंगओवर चार दिनों तक नहीं उतरने वाला !

लेकिन फिल्म यहाँ खत्म नहीं होती।  अभी रघु को ये भी तो पता लगाना है कि आखिर उनकी जान से प्यारी गर्लफ्रेंड को फंसाया किसने और आखिर क्यों ? जो राज़ खुलता है , वह आपको ले जाता है हिमेश आका रघु के सुदूर बचपन में जहाँ ये परतें खुलती हैं कि कौन लेना चाहता था उनसे बदला और क्यों !

उस राज़ के लिए, फिल्म देखिये। सब हम ने ही बता दिया तो आप क्या देखेंगे?
मूवी रिव्यू 'तेरा सुरूर' : इसका हैंगओवर चार दिनों तक नहीं उतरने वाला !
Source : djmazahot.com

हिमेश ने आश्चर्यजनक रूप से बेहतर एक्टिंग की है।  फराह करीमी ने कुछ भी नहीं किया पूरी फिल्म में सिवाय सुन्दर लगने के।  उनको डायलाग दिए जा सकते थे और उनसे ज़्यादा एक्टिंग करायी जा सकती थी।  नसीरुद्दीन जितनी भी देर स्क्रीन पर हैं , काफी अच्छे लगे हैं।  संगीत ठीक है , लेकिन एक बात तो पक्की है - आपको पुरानी यादों के ट्रिप पर ले जायेगी ये फिल्म जहाँ बेहद पुराने से पुराने गाने भी आपको बजते सुनाये देंगे।  देखने के लिए तैयार रहिएगा। 

बाकी फिल्म छोटी सी है , बिलकुल फराह करीमी के रोल जितनी।  जा सकते हैं।  देखिये और वापिस आके कमेंट कीजिये : जय माता दी लेट्स रॉक!