सूरज बड़जात्या की फिल्मों में ये नहीं देखा तो क्या देखा !

सूरज बड़जात्या को कौन नहीं जानता ! राजश्री प्रोडक्शन्स के कर्ता-धर्ता सूरज की बनायीं हुई फिल्में देखकर एक पूरी पीढ़ी जवान हुई है। नब्बे के दशक में जब भारत विदेशी व्यापार और संस्कृति को लेकर खुल रहा था और पूँजीवाद के साथ ग्लोबलाइजेशन बढ़ रहा था, उस समय सूरज बड़जात्या की फिल्मों ने भारत की जनता को संस्कारों की घुट्टी पिलाकर अतीत के ग्लोरिफिकेशन से जोड़े रखा और इसी वजह से उनकी फिल्मों का सुपर-डुपर हिट होना संभव हुआ।  

सूरज बड़जात्या की फिल्मों में ये नहीं देखा तो क्या देखा !

आज के समय में भी जहाँ पर रिश्तों और परिवार को लेकर नए समीकरण बन रहे हैं, वहां सूरज का अपना स्टाइल बिलकुल भी नहीं बदला। उनकी फिल्मों में वो सभी चीज़ें मिल जाएंगी जो आज से 20 साल पहले भी मिलती थीं। आइये देखिये सूरज बड़जात्या की फिल्मों में क्या आपको हमेशा देखने को मिलेगा :

भरा -  पूरा परिवार -  इतना बड़ा परिवार कि दो बसें छोटी पड़ जाएँ। या शायद ट्रेन !

सूरज बड़जात्या की फिल्मों में ये नहीं देखा तो क्या देखा !

उस परिवार की ट्रिप्स - इतना बड़ा परिवार जो दो बसों में आ जाए, उसका बाहर जाना भी तो ज़रूरी है न।

सूरज बड़जात्या की फिल्मों में ये नहीं देखा तो क्या देखा !

शादी - इतने बड़े परिवार में किसी ना किसी की तो उम्र तो होगी ही शादी की।  तो इन फिल्मों में शादी होना भी ज़रूरी है।

सूरज बड़जात्या की फिल्मों में ये नहीं देखा तो क्या देखा !

प्रेम नाम का लड़का - चाहे सलमान  खान ना भी हों तो  भी सूरज बड़जात्या की फिल्म में प्रेम नाम का किरदार होना ज़रूरी है।  आखिर प्रेम ज़िन्दगी में बहुत ज़रूरी जो ठहरा।

सूरज बड़जात्या की फिल्मों में ये नहीं देखा तो क्या देखा !

शर्माने वाली एक्ट्रेस - दुनिया की पूरी शर्म का ठेका इनकी। चाहे ज़िन्दगी में जो कुछ भी कर लें , सबसे ज़्यादा एक्सपर्ट ये शर्माने में होती हैं।  

सूरज बड़जात्या की फिल्मों में ये नहीं देखा तो क्या देखा !

आधी  फिल्म इंडस्ट्री - इनकी फिल्म में इतने सारे एक्टर्स तो होते ही हैं साथ ही साथ क्रू,  बैकग्राउंड एक्टर्स और डांसर्स के साथ लगभग आधी फिल्म इंडस्ट्री इनकी फिल्मों में होती है। 

सूरज बड़जात्या की फिल्मों में ये नहीं देखा तो क्या देखा !

संस्कार-  इनके बिना सूरज बड़जात्या की कोई भी फिल्म पूरी नहीं  होती। गेम ऑफ़ थ्रोन्स में बिना मौत के दो सीज़न चल सकते हैं लेकिन सूरज बरजात्या की फिल्म में संस्कार ना हों ऐसा हो नहीं सकता। 

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