'साला खड़ूस' में आर. माधवन ने किया इम्प्रेस , लेकिन रितिका सिंह बनीं रियल हीरो !

आदित्य तोमर के किरदार में माधवन का सपना होता है इस फिल्म में बॉक्सिंग चैंपियन बनना , लेकिन आखिरी समय में अपने कोच की धोखेबाज़ी की वजह से वो  हार जाते हैं।  सालों बाद उनको मौका मिलता है अपना ये सपना सच करने का , लेकिन एक थकी-हारी इंडियन बॉक्सिंग टीम का कोच बनकर।  

अपनी इस यात्रा में वो ढूंढने निकलते हैं अपना नया चैंपियन और इसके दौरान उन्हें मिलती  है एक तेज़ तर्रार मछुआरन (रीतिका सिंह) जो आदित्य को उसके पहले के दिनों की याद दिलाती है।आदित्य मधि को ट्रेन करता है और उसे जीतने लायक बनाता है।   उसके बाद शुरू होती है फिल्म की वो कहानी जिसमे सब कुछ है - कोच-स्टूडेंट की रिलेशनशिप , भाई बहन के बीच की लड़ाइयां  प्यार - सबको एक खूबसूरत धागे में पिरोया गया है।  

यह फिल्म मैरी कॉम या चक दे इंडिया जैसी नहीं है , लेकिन वादा करती है कि इंस्पिरेशन की डोज़ ज़रूर मिलेगी।  

यह फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित कही जा रही है , एक फैक्ट जिसे यह माना जा सकता है कि इंडियन वीमेन बॉक्सिंग  टीम ने 2006 में सभी मुश्किलों के बावजूद वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती थी।  

फिल्म में कमियां हैं , रोमांटिक एंगल थोड़ा जल्दबाज़ी में फिल्माया गया है और अंत प्रेडिक्टेबल है।  लेकिन इन सबके अलावा फिल्म काफी फील गुड है।  देखा जाना चाहिए, यह साल अभी तक फिल्मों के लिए बेहद अच्छा रहा है अभी तक।  

'साला खड़ूस' में आर. माधवन ने किया इम्प्रेस , लेकिन रितिका सिंह बनीं रियल हीरो !
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R. Madhavan