बॉलीवुड की इन 15 फिल्मों ने इंटरवल के बाद खो दिया अपना प्लॉट !

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में किसी भी फिल्म को हमेशा 2 पहलुओं में आंका जाता है - पहला हाफ और दूसरा हाफ। जहां फिल्म को उसकी शुरुआत, मध्य, एंटी-क्लाइमेक्स और क्लाइमेक्स के द्वारा जांचा जाता है वहीं भारत में हमें अपनी राय फिल्म के इंटरवल से पहले और बाद की कहानी के आधार पर देने की आदत है।

'फर्स्ट हाफ अच्छा था लेकिन सेकंड हाफ थोडा स्लो था!' ये बात आपने पहले कई बार सुनी होगी। ये एक फिल्म की कहानी को फॉलो करने का इतना बुरा तरीका भी नहीं है क्योंकि हम सभी एक फ़िल्मकार के कहानी सुनाने के स्टाइल को फॉलो करने की आदत है। एक फिल्म में इंटरवल के पहले और बाद में कई बड़े और छोटे बदलाव आते हैं। जहां कुछ फ़िल्मों में पहले हाफ में सकारात्मक बातें दिखाई जाती हैं तो वहीं कुछ अपनी सही रफ़्तार दूसरे हाफ में ही पकडती हैं।

क्या फिल्म 'लगान' इतनी बड़ी हिट होती अगर उसका दिलचस्प दूसरा हाफ उसके स्लो पहले हाफ को और बेहतर ना बनाता? ऐसा कई फिल्मों में हुआ है जब कहानी के दूसरे भाग में फिल्म का प्लाट ही खो गया और सारी फिल्म का मज़ा खराब हो गया। इससे ज़्यादा निराश करने वाली बात और कुछ नहीं होती जब एक फिल्म का पहला भाग अच्छा होने के साथ-साथ आपकी दिलचस्पी को बढ़ाये और दूसरे भाग में आपकी सारी उम्मीदों में पानी फिर जाए।

आइये आपको बताते हैं कुछ ऐसी ही फिल्मों के बारे में जिन्होंने दुसरे भाग में पानी-पानी कर दीं हमारी उम्मीदें -

बॉलीवुड की इन 15 फिल्मों ने इंटरवल के बाद खो दिया अपना प्लॉट !