जानिये क्यों 'बिग बॉस' का सीज़न 11 देखने लायक नहीं है!

2011 तक 'बिग बॉस' टीआरपी चार्ट का किंग हुआ करता था। लोनावाला में लगे शो के सेट पर जो भी होता है वो अगले दिन सबकी चर्चा का विषय होता है। लें हाल ही के दिनों में अगर आप बिग बॉस की रेटिंग देखेंगे तो आप पायेंगे कि शो की टीआरपी में काफी गिरावट आई है। कैसे आइये आपको बताते हैं! 

शो लेकर पहले से ही लोगों के बीच काफी चर्चा थी। बिग बॉस का ये सफ़र 18 कंटेस्टेंट के साथ शुरू हुआ,जिसमें अब तक के सभी कंटेस्टेंट हल्ला करने में काफी माहिर हैं। सभी को सबसे ज़्यादा चिल्लाने में,लड़ाई करने में और ड्रामा क्रिएट करने में काफी मज़ा आता है ताकि कैमरा उन्हीं पर सारा फ़ोकस रहे। इसे कोई निष्कर्ष नहीं निकलता और अंत में आकर किसी न किसी को ये लड़ाई रोकनी ही पड़ती है। अगर आप ध्यान दें तो आप पाएंगे कि हर 5 मिनट बाद ये प्रक्रिया दोबारा होती है। इनमें वो लोग शामिल हैं जो या तो कोई नहीं हैं या ऐसे लोग हैं जो बहुत पॉपुलर हैं और नहीं चाहते कि उनकी पॉपुलैरिटी गिरे।   

इस बार बिग बॉस एक अच्छे कांसेप्ट के साथ आया जिसमें अजनबी लोगो को लिया गया उन्हें घर में बंद किया और चाभी फेंक दी गयी।शो में आगे क्या होगा ये किसी को नहीं पता होता और ये सिर्फ एक तरीके का सोशल एक्सपेरिमेंट होता है। मगर शो की पॉपुलैरिटी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इंडिया के अलावा इस शो के 55 वर्शन अलग अलग देशों में चलते हैं।

हिंदी टेलीविज़न पर मेकर्स वही पुराना फार्मूला दोहराते हैं जैसे कि कंटेस्टेंट की सेक्सुअलिटी का मज़ाक बनाया जाता है। टीआरपी की चाहत के लिए कंटेस्टेंट की रोमांटिक रिलेशनशिप दिखाई जाती है और यहां तक की लड़ाई भी लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए होती है। आप कुल मिलकर ये सोच सकते हैं कि शो में जो कुछ भी होता है वो सब फेक यानी नकली होता है और क्योंकि शो की थीम ऐसा चाहती है।

अब जब भी कंटेस्टेंट इसी तरह घिसी-पिटी कहानी दर्शाने की सोचते हैं हमारी जनता और स्मार्ट हो गयी है और वो चैनल ही बदल देती है। अक्टूबर के पहले दो हफ्ते का रेटिंग डाटा सामने आ चुका है और दूसरे हफ्ते में ये शो सिर्फ 20th स्पॉट तक ही जा पाया। यहां तक की अपने प्रीमियर के पहले हफ्ते में भी शो टॉप 20 में जगह बनाने में नाकामयाब रहा। 

BAARC  यानी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च कॉउन्सिल ऑफ़ इंडिया द्वारा दिए गए डाटा के अनुसार बिग बॉस हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट केटेगरी की कंबाइंड केटेगरी में 20 स्लॉट्स से भी नीचे रैंक करता है। बिग बॉस ने पहले हफ्ते में सिर्फ 4.9 मिलियन लोगों को ही इम्प्रेस किया और नगरीय शो की रेटिंग्स में 11 वीं पोजीशन बनाने में सफल हुआ। ग्रामीण रैंकिंग के अनुसार तो बिग बॉस पिछले दो हफ़्तों में टॉप 20 में जगह बनाने में ही नाकामयाब रहा। 

अक्टूबर के पहले हफ्ते में (2-8 अक्टूबर ) अमिताभ बच्चन का शो 'कौन बनेगा करोड़पति' हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट केटेगरी की कंबाइंड केटेगरी के अनुसार नंबर वन पर रहा जिसने 11.53 मिलियन लोगों को प्रभावित किया। इसके बाद कुंडली भाग्य देखने वाले (11.21 मिलियन) और कुमकुम भाग्य के (9.70 मिलियन) लोग नोटिस किये गए। सीरियल इस प्यार को क्या नाम दूं न भी टॉप 20 में जगह बनाई और 6.07 मिलियन लोगों को प्रभावित किया।    

 जानिये क्यों 'बिग बॉस' का सीज़न 11 देखने लायक नहीं है!

हालांकि दूसरे हफ्ते में बिग बॉस थोड़ा ऊपर चढ़ा  6.03 मिलियन प्रभाव के साथ तो वही कौन बनेगा करोड़पति 10.16 मिलियन के साथ। इसके बाद कुंडली भाग्य 11.63 मिलियन और कुमकुम भाग्य 10.78 मिलियन के साथ टॉप रेटेड शो रहे। इस रैंक में बिग बॉस 4.84 मिलियन इम्प्रैशन के साथ अर्बन रेटिंग में 10 वीं पोजीशन पर है।  

 जानिये क्यों 'बिग बॉस' का सीज़न 11 देखने लायक नहीं है!

पिछले चार सालों में बिग बॉस टीवी रेटिंग में बेहतरीन था जिसके अंतर्गत (TAM, TRP और BARC रेटिंग्स) आते हैं। हालांकि लास्ट सीज़न में रैंकिंग लौ थी और ये 20वें स्थान पर था। यहां हम आपको इसकी पिछले 9 सीजन की BAARC रेटिंग्स दिखाएंगे क्योंकि 10वी सीज़न की रेटिंग्स अभी आयी नहीं हैं और मैट्रिक्स बदल गया है इसलिए तुलना करना थोड़ा मुश्किल है।

 जानिये क्यों 'बिग बॉस' का सीज़न 11 देखने लायक नहीं है!