Lipstick Under My Burkha

Lipstick Under My Burkha

3.1 1,913 Ratings

Directed by : Alankrita Shrivastava

Release Date :

  • MJ Rating 4.0/5
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plot

Lipstick Under My Burkha follows the lives of four different women who are constantly fighting a battle for their freedom. According to director Alankrita Shrivastava, the title of the film is metaphoric in nature & refers to the idea that women will always have a pulsating desire to be free. It also symbolizes their hidd...more

Verdict

“It proves that sharp narrative can co-exist with excellent humor in a socially relevant issue”

Lipstick Under My Burkha Credit & Casting

Konkana Sen Sharma

Lipstick Under My Burkha Audience Review

महिलाओं की बेबसी को बयां करती है फिल्म 'लिपस्टिक अंडर माय बुर्का' !

| by Usha Shrivas |
Rated 4.5 / 5
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साल की सबसे विवादित फिल्म कहीं जाने वाली 'लिपस्टिक अंडर माय बुर्का' लाख विवादों के बाद आखिरकार ये फिल्म 21 जुलाई को रिलीज़ हो रही है।  फिल्म की कहानी ऐसी चार महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपनी इच्छाओं को पूरा करना चाहती हैं। 


फिल्म हर उम्र की चार महिलाओं की कहानी हैं, जिसमें ऊषा पारकर नाम की महिला हैं जिन्हें सब बुआ जी के नाम से जानते हैं। बुआ जी 53 साल की महिला हैं, जो इस उम्र में भी प्यार करने के सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करना चाहती हैं। इस किरदार को मशहूर एक्ट्रेस रतना पाठक शाह ने निभा कर इस किरदार में जान फूंक दी है।  अगला किरदार शिरीन नाम की शादीशुदा महिला का है, शिरीन के रोल में कोंकना सेन जिसकी जिन्दगी बस बच्चे पैदा करने तक ही सीमित रह गई है। तीसरा किरदार एक खूबसूरत जवान लड़की लीला यानी आहाना का है जो अपनी सगाई वाले दिन भी अपने प्रेमी के प्यार के गुल खिलाती है। वो शादी जैसे बंधनों में बंधना नहीं चाहती है और प्रेमी से लाख गालियाँ सुनने के बाद भी उसी के साथ रहना चाहती है।  और चौथा किरदार है रिहाना का है जो घर और मोहल्ले में तो आपको बुर्के में नज़र आएगी, लेकिन घर से बाहर निकलते ही उसे जींस पहना है, गाना गाना है और बाकि लड़कियों की तरह पार्टीज़ करनी है। रिहाना का किरदार प्लाबिता ने निभाया है। 


फिल्म की कहानी बहुत साधारण सी है, इस फिल्म के किसी न किसी किरदार से आप अपने आप को जोड़ जरुर लेंगे। फिल्म के कुछ सीन देख कर आप भी कह उठेंगे कि इस वजह से इस फिल्म को भारत में रिलीज़ नहीं किया जा रहा था। 


चार महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती ये फिल्म उन पहलुओं को भी छू लेती जिस बारे में आज तक बात तक नहीं की गई।  महिलाओं की उन दबी हुई इच्छाओं को उजागर करती ये फिल्म अपने आप में खास है।  फिल्म में 1-2 गाने है जो इस कहानी के साथ फिट बैठ रहे हैं।


फिल्म का निर्देशन अलंकृता श्रीवास्तव ने किया है और फ़िल्म के हर सीन और कहानी पर बेहतर तरीके से काम किया गया है। ऑडियंस की पसंद बदलने के लिए ये उनकी अच्छी कोशिश है। महिलाओं की आज़ादी पर बनी ये फिल्म बाहरी आज़ादी के साथ आंतरिक आज़ादी और इच्छाओं को पूरा करने की मांग करती है।


 

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