इन 5 कारणों की वजह से संजय लीला भंसाली की फिल्म 'देवदास' आज भी सभी के दिल में बसी हुई है।

2002 में जब फिल्म इंडस्ट्री अपने बुरे दौर से गुज़र रह थी और शुरू के आधे साल को घटिया करार दे दिया गया था जब सभी की नज़रें और उम्मीदें संजय लीला भंसाली की आने वाली फिल्म 'देवदास' पर टिकी हुई थीं। वो ऐसा साल था जब बॉलीवुड की कुछ ही फ़िल्में ढंग से कमाई कर पायी थीं। 'देवदास' उस साल की सबसे बड़ी रिलीज़ थी। लगभग 50 करोड़ के बजट में बनी ये फिल्म उस समय की सबसे महँगी फिल्म थी।

इन 5 कारणों की वजह से संजय लीला भंसाली की फिल्म 'देवदास' आज भी सभी के दिल में बसी हुई है।

'देवदास' में एक बेहतरीन कास्ट को लिया गया था। शाहरुख़ खान, ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित जैसे बड़े और कमाल के सितारे में मुख्य किरदार निभा रहे थे। ये संजय लीला भंसाली की फिल्म थी और इसी वजह से फिल्म को खुद को साबित करना था। दर्शकों ने 1955 में आई दिलीप कुमार स्टारर फिल्म 'देवदास' को पहले ही देखा था और माना जा रहा था कि संजय लीला भंसाली इस फिल्म को लिखने में कुछ नया नहीं कर पाएंगे। लेकिन जब ये फिल्म बड़े परदे पर आई इसने अपने कमाल के भव्यात्मक दृश्यों और रचनात्मकता से दर्शकों का दिल जीत लिया।

इस फिल्म की 15वीं सालगिरह पर आइये बात करते हैं इस फिल्म की ख़ास बातों के बारे में जिन्होंने दर्शकों को दीवाना बना लिया !

डायलॉग्स

इन 5 कारणों की वजह से संजय लीला भंसाली की फिल्म 'देवदास' आज भी सभी के दिल में बसी हुई है।

देवदास की अपनी एक शैली थी, जिसकी सराहना आम दर्शक आसानी से नहीं करते। फिल्म में देवदास का किरदार निर्दयी, अपमानजनक और दुखी था। इस किरदार का दर्द, उसका घमंड और उसका प्यार इतना ताकतवर था कि दर्शक उसकी हर भावना में डूबे बिना नहीं रह पाए। इसी के साथ फिल्म में कुछ बेहतरीन डायलॉग्स भी आये, जिनकी वजह से फिल्म 'देवदास' का नाम सिनेमा की किताब के ऐतिहासिक पन्नों में जुड़ा। ऐसे ही कुछ डायलॉग हैं -

कौन कमबख्त बर्दाश्त करने के लिए पीता है, हम तो पीते हैं कि यहाँ बैठ सके, तुम्हे देख सकें, तुम्हें बर्दाश्त कर सकें!

बाबूजी ने कहा गाँव छोड़ दो, सबने कहा पारो को छोड़ दो, पारो ने कहा शराब छोड़ दो, आज तुमने कह दिया हवेली छोड़ दो, एक दिन आएगा जब वो कहेगा दुनिया ही छोड़ दो !

अपने हिस्से की ज़िन्दगी तो हम जी चुके हैं चुन्नी बाबू, अब तो बस धड़कनों का लिहाज़ करते हैं क्या कहें ये दुनियावालों को जो आखिरी साँस पर भी ऐतराज़ करते हैं!

आकर्षक दृश्य

इन 5 कारणों की वजह से संजय लीला भंसाली की फिल्म 'देवदास' आज भी सभी के दिल में बसी हुई है।

'देवदास' के हर एक फ्रेम में एक ऐसी खुशबू थी, जिसने पूरी फिल्म को खूबसूरती दी और दर्शकों के दिल में उतर गयी। उसका स्टाइल, सीन, उपन्यास का अनुकूलन सबकुछ बेमिसाल तरीके से किया गया था। संजय लीला भंसाली ने इस बात का ध्यान रखा कि उनकी जनता को वो सबकुछ और बहुत कुछ मिले जो वो देखना चाहती है और उसके आगे भी वो उनसे उम्मीदें रखें। फिल्म के सेट्स, किरदारों के कॉस्ट्यूम्स, बैकग्राउंड के रंग, पूरा प्रोडक्शन डिज़ाइन सबकुछ एक-दूसरे को पूरा कर रहा था। माधुरी के साँस थाम कर देखने वाली डांस स्टेप्स से लेकर ऐश्वर्या का शाहरुख़ के प्रति अटूट प्रेम तक, हर चीज़ ने दर्शकों को पहले सीन से लेकर अंत तक अपने साथ बाँधे रखा।

परफॉरमेंस

इन 5 कारणों की वजह से संजय लीला भंसाली की फिल्म 'देवदास' आज भी सभी के दिल में बसी हुई है।

जहाँ इस फिल्म में देवदास के किरदार में शाहरुख़ खान ने पूरी फिल्म को आगे बढ़ाया, वहीं बाकि किरदारों की परफॉरमेंस बेहतरीन थी। फिल्म में ऐश्वर्या की बढ़िया परफॉरमेंस ने उन्हें उनका पहले बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवार्ड जिताया था। वे पारो के किरदार के लिए बिल्कुल सही चुनाव थीं और उन्होंने अपने काम से दर्शकों ने उतनी ही सहानुभूति बटोरी जितनी की ज़रूरी थी।

चंद्रमुखी के किरदार में माधुरी भी इतनी बेमिसाल थीं कि उन्होंने अपने किरदार में भरपुर जान डाली। जहाँ हम सभी को पता था कि देवदास पारो का है हम सभी कहीं न कहीं चंद्रमुखी को उसका प्यार मिलने की उम्मीद कर रहे थे।

शराब

इन 5 कारणों की वजह से संजय लीला भंसाली की फिल्म 'देवदास' आज भी सभी के दिल में बसी हुई है।

शराब ही देवदास और उसकी ज़िन्दगी का सही अर्थ बताती है ! विशेष रूप से इस फिल्म ने शराब को अपनी अधिकतम क्षमता तक गौरवान्वित किया और इसके बावजूद भी देवदास को एक हारे हुए इंसान के रूप में दर्शाया (जो कि वो था) ! फिल्म के दूसरे भाग के हर एक फ्रेम में शाहरुख़ को शराब के नशे में और बेहद ग़मगीन रूप में दिखाया गया है। शराब ही एक वो चीज़ थी, जिसने इस फिल्म के कई हिस्सों को खूबसूरत और जानदार बनाया और इसका जो असर हुआ वो एकदम ड्रामेटिक था। अगर फिल्म 'शराबी' के बाद भारत की कोई ऐसी फिल्म है, जिसमें शराब का भरपूर इफ़ेक्ट हर जगह था तो वो देवदास है।

शाहरुख़ खान

इन 5 कारणों की वजह से संजय लीला भंसाली की फिल्म 'देवदास' आज भी सभी के दिल में बसी हुई है।

देवदास पूरी तरह से शाहरुख़ खान की थी और इस बात में कोई शक़ नहीं है। फिल्म में शाहरुख़ का प्रभुत्व इतना संक्रामक था कि उन्होंने इस फिल्म में अपने करियर की सबसे बेस्ट परफॉरमेंसेज़ में से एक दी। उनके कमाल के प्रदर्शन की वजह से हम एक बार को दिलीप कुमार को भी भूल गए थे। फिल्म के एक सीन में जब देवदास पंडित जी को अपना ही श्राद्ध करने को कहता है और जब वो अपने पिता के अंतिम संस्कार में जाता है, ये दो सीन इतने दमदार और दर्दनाक थे कि दर्शकों को हिला कर रख दिया। शाहरुख़ के अलावा ये सीन्स किसी और को करते देखना मुमकिन ही नहीं है। उनका चिड़चिड़ापन, प्यार, ना उम्मीदी और अस्वीकृति जो शाहरुख़ ने पूरी फिल्म में दिखाई काबिल-ए-तारीफ थी।

'देवदास' ने 2002 में जो कमाल कर दिखाया उसका असर आज भी दिखाई देता है। इस फिल्म में हमारी फिल्म इंडस्ट्री को एक नयी पहचान दी  हमेशा हम सभी को फेवरेट बनी रहेगी !