क्यों है आज भी 'दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे' एक आइकॉनिक फिल्म ?

आज से 21 साल पहले एक ऐसी फिल्म रिलीज़ हुई जिसने कई पीढ़ियों के लिए रोमांस का मतलब ही बदल कर रख दिया !

जी हाँ , आदित्य चोपड़ा निर्देशित फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' आज से 21 साल पहले 1995 में रिलीज़ हुई थी , और इसी फिल्म के साथ   करोड़ों लोगों का प्यार, इश्क़ और मोहब्बत को लेकर बदल गया नजरिया ! इस फिल्म ने शाहरुख़ खान और काजोल की जोड़ी को एक अमर किवदंती बना दिया , कुछ इस तरह स कि आज भी इनके रोमांस का उदाहरण दिया जाता  है। 

क्यों है आज भी 'दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे' एक आइकॉनिक फिल्म ?

फिल्म की कहानी कोई बहुत ख़ास नहीं थी , इसे ख़ास बनाया इसके ट्रीटमेंट ने।  कहानी तो सीढ़ी सादी सी थी  जिसमें एक एन आर आई लड़के को एक एन आर आई लड़की से प्यार हो जाता है और वो अपनी भारतीय जड़ों के सहारे उसके परिवार का दिल जीतने की कोशिश करता है।  इसमें परेशानियां भी आती हैं और वो हारने की कगार तक भी पहुँच जाता है लेकिन अंत में उसके प्यार की जीत होती है।  

क्यों है आज भी 'दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे' एक आइकॉनिक फिल्म ?

इस फिल्म पॉपुलर होने की वजह शायद कास्ट रही हो, या डायरेक्शन, लेकिन  इस फिल्म के लेजेंडरी होने एक सबसे बड़ी वजह इसकी टाइमिंग भी थी।  जिस समय यह फिल्म रिलीज़ हुई, लोग विदेशों में जाकर बसने शुरू हुए थे, और काफी संख्या में एन आर आई लोगों को देश और विदेश  के बीच झूलते हुए अपनी संस्कृति की याद सता रही थी।  उसी माहौल के बीच में एक प्रेम कहानी के साथ हिंदुस्तानियत का डोज़ जब इंजेक्ट किया गया , तो रिज़ल्ट ऐसा आया जिसने सबकी आँखें चुँधिया गयीं। 

क्यों है आज भी 'दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे' एक आइकॉनिक फिल्म ?

राज और सिमरन की कहानी को ना जाने कितने जवाँ दिलों ने प्यार का नया बेंचमार्क बना लिया।  आज बीस साल बाद भले ही फिल्म को लेकर बहसें होती हों, लेकिन कि अपने समय के हालात के हिसाब से बनी इस फिल्म का कोई तोड़ नहीं निकल पाया।  आज भी लड़के गिटार बजाना सीखते हैं तो सबसे पहली धुन शायद 'तुझे देखा तो ये जाना सनम' की सीखते हैं।  लड़कियाँ अपने कमरों में टॉवल डांस करती हैं तो आँखों के सामने सिमरन कौंध जाया करती है।  

क्यों है आज भी 'दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे' एक आइकॉनिक फिल्म ?

 इन सालों में बहुत कुछ बदल गया, नहीं बदले तो राज और सिमरन , यहीं कहीं अपनी प्यार की नयी कहानी ढूँढ़ते हुए मिल जाते हैं चौक-चौबारों में।