हरामखोर : ऑडियंस रिव्यू

लड़कियों की सुरक्षा और पालन-पोषण पर बनी ये फिल्म आपको झकझोर कर रख देगी !

हमारे देश की ऐसी कई बातें और कई सच हैं जिन्हें हम नज़रअंदाज़ करते हैं। फिल्म 'हरामखोर' आपको ऐसे ही सच के बारे में बताती है। आजकल जहाँ हर जगह महिला सशक्तिकरण की बात होती है वहीं ये फिल्म आपको देश के उस काले सच के बारे में बताती है, जिसे आप जानते तो हैं लेकिन काफी हद तक नज़रअंदाज़ करते हैं। 

फिल्म की कहानी कुछ इस तरह है कि एक स्कूल टीचर को अपनी एक स्टूडेंट में कुछ ज़्यादा ही दिलचस्पी है। ये फिल्म की कहानी 4 किरदारों के इर्द-गिर्द घुमती है और वो हैं स्कूल के बच्चे कमल (इरफ़ान खान), मिंटू (मोहम्मद समद), संध्या (श्वेता त्रिपाठी) और उनके टीचर श्याम (नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी)। कमल संध्या को पसंद करता है लेकिन बोल नहीं पाता। वहीं संध्या खुद अपनी जिंदगी से ख़ासी परेशान है। माँ के घर छोड़ने के बाद उसका ख्याल रखने के लिए कोई नहीं है और उसके पिता एक शराबी अफसर हैं। अपनी इस परेशानी में उसे सिर्फ़ एक ही इन्सान याद आता है और वो है उसका टीचर श्याम। 

हरामखोर : ऑडियंस रिव्यू

एक रात श्याम के घर मदद के लिए पहुँची संध्या वो देखती है जो उसे नहीं देखना चाहिए था और फिर शुरू होता है श्याम और संध्या का रिश्ता। श्याम सिर्फ़ संध्या के शरीर का इस्तेमाल कर रहा है लेकिन संध्या उसे पसंद करने लगी है। एक आदमी का अपने से आधी उम्र की लड़की के साथ ज़बरदस्ती शारीरिक संबंध बनाना भी शारीरिक शोषण ही है। 

कच्ची उम्र में बच्चों को बहकाना काफी आसान होता है। बाल अवस्था में बच्चों को सही मार्गदर्शन की ज़रूरत होती है जो उन्हें सिर्फ अपने माता-पिता से ही मिल सकता है। लेकिन अगर माता-पिता ही अपने बच्चों का ध्यान नहीं रखते तो वे अपनी जिंदगी के खालीपन को भरने के लिए अलग-अलग रास्ते ढूँढने लगते हैं और गलत राह पकड़कर चलने लगते हैं। यही हुआ संध्या के साथ जिस आदमी को वो अपना शरीर सौंप रही थी वो उसका टीचर बनने के लायक भी नहीं थ। श्याम ने संध्या को अपने इशारों पर ऐसा नचाया कि वो उसे ही अपना सब कुछ मानने लगी। 

इस फिल्म में संध्या और श्याम को एक अलग तरह का रिलेशन में दिखाया गया है। वहीं बात करें कमल और मिंटू की तो ये कहना गलत नहीं होगा कि जब हम अपने बच्चों पर ध्यान नहीं देते और जो बच्चों को बताते नहीं है उसकी वजह से वे कुछ ऐसा कर देते हैं जो उन्हें नहीं करना चाहिए। छोटी उम्र में बच्चे जब गलत रात पर हलते हैं तो अपराध की राह भी पकड़ लेते हैं। 

हरामखोर : ऑडियंस रिव्यू

इसके अलावा आपको ये बात याद रखने की ज़रूरत है कि गुस्सा इन्सान का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। अपनी चिढ़ और खुन्नस आपको हमेशा काबू में रखनी चाहिए वरना आप अपने कर्मों से दूसरों का नुकसान करते हैं और उसकी सज़ा आपको भी चुकानी पड़ती है। 

इस फिल्म में सभी ने अच्छी एक्टिंग की है। फिल्म के अन्दर कोई गाना नहीं है लेकिन फिल्म के अंत में जो गाना आता है वो आपको मुग्ध करने की क्षमता रखता है। इस फिल्म को देखकर आप हिल जायेंगे और कहीं ना कहीं आपको भी इस कहानी को समझने के बाद गुस्सा आएगा। ऐसा क्यों होगा ये मैं नहीं कह सकती है। ये भी हो सकता है कि झटके की वजह से आपको कुछ महसूस ही ना हो लेकिन जब आपको धीरे-धीरे फिल्म समझ में आएगी तो आप ज़रूर इसके बारे में लिखना या किसी को बताना चाहेंगे। 

इसी के साथ इस फिल्म को मिलते हैं 3 स्टार्स और सभी को ये फिल्म एक बार ज़रूर देखनी चाहिए !