बाजीराव मस्तानी रिव्यू : रणवीर सिंह को अपनी अवार्ड स्पीचेज़ के साथ तैयार रहना चाहिए !

संजय लीला भंसाली की मेहनत का फल- बाजीराव मस्तानी बेहद कमाल की है !

साफ़ तौर पर कहा जाए तो इंडिया में लोगों ने ऐसी फिल्म शायद ही कभी देखी होगी।  स्पेशल इफेक्ट्स और बैकग्राउंड स्कोर के साथ गज़ब का संगीत मिल जुल कर बाजीराव को बनाते हैं एक श्योर शॉट विनर !


How would you rate the Ranveer Singh, Priyanka Chopra and Deepika Padukone starrer Bajirao Mastani?

Posted by Desimartini on Thursday, December 17, 2015
प्लॉट :

बाजीराव , जिसने अनगिनत लड़ाइयाँ जीतीं, अपने दिल को बुंदेलखंड की एक राजकुमारी के हाथों हार जाता है। लेकिन वो काशीबाई (प्रियंका चोपड़ा ) से विवाहित है जोकि एक बेहद समझदार एवं मजबूत स्त्री है (मराठियों की तरह ) । लेकिन ये कहानी है उन जंगों के बारे में जो हम अपनी ज़िन्दगियों में अपने प्रियजनों के लिए लड़ते हैं , न कि उन लड़ाइयों के बारे में जो मैदानों में लड़ी जाती हैं। 

कला निर्देशन :

संजय लीला भंसाली को भव्य और आलीशान सेट्स बनाने में महारत हासिल है।  पूरी फिल्म एक खूबसूरत सफर की तरह है जिसका एक एक फ्रेम साँसें थाम लेने वाला है।  चमचमाते झूमरों से लेकर बाजीराव की खून से तर आँखों तक - इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा में एक नया मील का पत्थर तय किया है।  ऐसा नहीं लगता की कोई और आने वाले समय में इसे टक्कर दे पायेगा , आशुतोष गोवारिकर भी नहीं जिन्हें पीरियड फ़िल्में बनाने का शौक है।  

 
परफॉर्मेंसेज़ :

दीपिका से बेहतर मस्तानी मिलना संजय लीला भंसाली के लिए बेहद मुश्किल होता ।  ऐश्वर्या राय भी शायद ऐसी तेज भरी आँखों वाली परफॉरमेंस नहीं दे पातीं।  इसी  के साथ दीपिका ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह बॉलीवुड की रानी हैं।  यह समझना  मुश्किल है कि दीवानी मस्तानी गाने में दीपिका को देखें या शीशमहल को क्योंकि सब कुछ इतना खूबसूरत है। उनका नृत्य "रंग दे मोहे लाल" गाने में भी बेहद सुन्दर है।  


प्रियंका चोपड़ा काशीबाई के किरदार में बेहद जंचती हैं वो भी उस जलन के साथ जो किसी  भी विवाहित स्त्री को होती है जब उसका पति किसी और स्त्री के प्रेम में पड़ जाता है।

रणवीर सिंह इस साल के अवार्ड फंक्शन्स के लिए अपनी स्पीचेज़ तैयार कर सकते हैं।  इस एक्टर का टैलेंट संजय लीला भंसाली ने कमाल के तरीके से ट्रैप किया है।  वो अपनी गर्व और उत्साह के साथ हर सीन में जादू सा घोल देते हैं।  


बाजीराव की माँ के रोल में तन्वी आज़मी ने क्या खूब अभिनय किया है।  मिलिंद सोमण के अभिनय की तारीफ करना बनता है क्योंकि उन्होंने बाजीराव और उसके बेटे (शमशेर बहादुर) के साथ वाले सीन्स में कमाल का साथ दिया है।  इस छोटे बच्चे की एक्टिंग की भी दाद देनी पड़ेगी।   

 
संगीत और कॉस्ट्यूम्स :

संजय लीला भंसाली इस तरह की फिल्मों का संगीत देने में महारथी हैं।  मराठी से लेकर डिवोशनल और सोलफुल संगीत तक सब कुछ इसमें है।  अंजू मोदी को साधारण लोगों के लिए कपडे डिज़ाइन करना शुरू कर देना चाहिए नहीं तो सबकी जेब हलकी होती रहेगी।  

बाजीराव मस्तानी रिव्यू : रणवीर सिंह को अपनी अवार्ड स्पीचेज़ के साथ तैयार रहना चाहिए !
Source : Desimartini
निष्कर्ष :

बाजीराव न देखने का कोई रीज़न नहीं है।  स्टोरी स्क्रीनप्ले म्यूज़िक, सब कुछ कमाल का है, वो भी ऐसा कि दो बार थिएटर चले जाय जाए।  


मोहब्बत का कोई मज़हब नहीं होता , मोहब्बत खुद में एक मज़हब है।  संजय लीला भंसाली ने ऑडियंस से मोहब्बत की है , ऐय्याशी नहीं।